Posts

. ओवर-द-काउंटर मार्केट (OTC Market):

यह एक ऐसा बाजार होता है जहाँ शेयरों की ट्रेडिंग स्टॉक एक्सचेंज के बाहर होती है। इसमें ब्रोकर और डीलर आपस में सौदे करते हैं। मुख्य विशेषताएं: कम मान्यता प्राप्त कंपनियों के शेयर जोखिम थोड़ा अधिक विनियमन (regulation) कम होता है

11. शेयरों के प्रकार (Types of Shares),

शेयर मार्केट में ट्रेड होने वाले शेयर भी अलग-अलग प्रकार के होते हैं: 1. इक्विटी शेयर (Equity Shares) सबसे सामान्य शेयर। कंपनी का मालिकाना हक देते हैं। लाभ/हानि कंपनी के प्रदर्शन पर निर्भर करता है। आमतौर पर यहीं पर सबसे ज़्यादा ट्रेडिंग होती है।

2. सेकेंडरी मार्केट (Secondary Market)

यह वह बाजार है जहाँ पहले से जारी किए गए शेयरों की खरीद-बिक्री होती है। यहाँ निवेशक आपस में शेयरों की ट्रेडिंग करते हैं। यह लेनदेन स्टॉक एक्सचेंज जैसे NSE (National Stock Exchange) या BSE (Bombay Stock Exchange) पर होता है। उदाहरण: अगर आपने पहले किसी कंपनी का शेयर खरीदा है और अब उसे किसी और को बेच रहे हैं, तो यह सेकेंडरी मार्केट में आता है।

🏛️ शेयर मार्केट के दो मुख्य प्रकार

1. प्राइमरी मार्केट (Primary Market).                            प्राइमरी मार्केट वह बाज़ार है जहाँ कंपनियाँ पहली बार अपने शेयर जारी करती हैं ताकि फंड (पैसा) जुटा सकें। इसे हम IPO (Initial Public Offering) भी कहते हैं। 📌 उदाहरण: मान लीजिए कोई कंपनी “XYZ Ltd.” है, जिसे व्यापार बढ़ाने के लिए ₹100 करोड़ चाहिए। वो अपने शेयर लोगों को पहली बार बेचती है यानी IPO लाती है — यही प्रक्रिया प्राइमरी मार्केट कहलाती है। ✅ प्राइमरी मार्केट की खास बातें: कंपनी और निवेशक के बीच सीधा लेन-देन एक बार ही होता है (IPO के समय) इसमें Risk थोड़ा कम होता है

✅ निवेश से पहले ध्यान रखें

1.कंपनी की पूरी जानकारी लें 2.लॉन्ग टर्म सोचें 3.एक्सपर्ट की सलाह लें

⚠️ जोखिम (Risk)

1.शेयर की कीमतें ऊपर-नीचे होती हैं 2.बिना जानकारी के निवेश करने से नुकसान हो सकता है 3.मार्केट के उतार-चढ़ाव को समझना जरूरी है

📈 शेयर मार्केट के फायदे

1.निवेश करके पैसा बढ़ाया जा सकता है 2.लंबी अवधि में अच्छा रिटर्न मिलता है 3.कंपनी के प्रॉफिट में डिविडेंड मिलता है